JAMMU KASHMIR: पाकिस्तान के रिटायर सैनिक जम्मू में मचा रहे आतंक! US आर्मी के हथियार और चीन के सेट फोन का इस्तेमाल, खुल गई सारी पोल

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में भारतीय सेना के ट्रकों पर हुए घातक हमला करने वाले आतंकवादियों को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चल रहा है। इस हमले में पांच जवान मारे गए थे। जम्मू इलाके में आतंकी हमलों में इजाफा हुआ है और आतंकवादी घने जंगलों और गुफाओं का फायदा उठा रहे हैं, जो उनके लिए पनाहगाह की तरह काम करते हैं। सोमवार को लगभग 03:30 बजे, चार से पांच आतंकवादियों ने ट्रकों पर गोलीबारी की और ग्रेनेड फेंके, जिसमें 10 जवान घायल हो गए। राजौरी और पुंछ जिलों में हुए हमलों में एक सा पैटर्न देखने को मिला। आतंकवादियों ने इलाके में गाड़ियों पर घात लगाकर हमला करने के लिए खराब सड़कों और अंधे मोड़ों का फायदा उठाया है।

इन पहाड़ी दर्रों में कई अंधे मोड़ हैं, जिससे ट्रकों की रफ्तार धीमी होने पर आतंकवादियों को फायदा मिलता है। कुछ ऐसा ही पैटर्न इस साल 9 जून को रियासी बस हमले में देखा गया था, जिसमें 9 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी। 4 मई को पुंछ में भारतीय वायु सेना के ट्रक पर इसी तरह का हमला हुआ था, जिसमें IAF के एक जवान की मौत हो गई, जबकि चार घायल हो गए थे।

CNN-News18 के मुताबिक, सुरक्षा बल भी ये मानते हैं कि जम्मू इलाके में घुसपैठ हुई है। वो ये भी दावा करते हैं कि घुसपैठ करने वाले विदेशी आतंकवादियों की संख्या 30-40 है, जो काफी ट्रेंड और हथियारों से लैस हैं।

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी आरआर स्वैन ने इसी महीने कुछ दिनों पहले जम्मू में मीडिया से कहा, "ऐसे विदेशी आतंकवादी हैं, जो घुसपैठ करने में कामयाब रहे हैं और हम सभी कमोबेश इस पर सहमत हैं, हम इसके बारे में जानते हैं और हम इससे पीछे नहीं हट रहे हैं।"

एक महीने में जम्मू के चार जिलों रियासी, डोडा, कठुआ और राजौरी में पांच आतंकी हमले हो चुके हैं। पुलिस ने हाल ही में कठुआ और डोडा में नौ SPO को कांस्टेबल बनाया है, जिन्होंने इन इलाकों में पांच आतंकवादियों को मार गिराया।

जम्मू में कैसे हुई आतंक की शुरुआत?

जम्मू में आतंक 11 अक्टूबर, 2021 को पुंछ जिले के चामरेर और भट्टा डुरियन जंगलों से शुरू हुआ, जब 10 दिनों से ज्यादा समय तक दोनों तरफ से गोलीबारी हुई।

चामरेर जंगलों में सेना के पांच जवानों की जान चली गई, जिसके बाद केवल छह दिनों में भट्टा डुरियन जंगलों में चार और लोगों की जान चली गई, जिनमें दो JCO भी शामिल थे।

30 अक्टूबर, 2021 को राजौरी के नौशेरा सेक्टर में कार्रवाई में सेना के दो और जवान मारे गए। बाद में, 11 अगस्त, 2022 को राजौरी के दरहाल इलाके में एक आतंकी हमले में पांच सैनिक मारे गए, जबकि दो हमलावर मारे गए।

अप्रैल 2023 में, पुंछ के मेंढर में भट्टा डुरियन में फिर से पांच सेना के जवानों की जान चली गई। फिर एक और हमले में पांच PARA कमांडो की जान चली गई। इसके बाद राजौरी के कांडी इलाके में आतंकियों ने IED विस्फोट किया, जिसमें एक मेजर रैंक का अधिकारी घायल हो गया।

नवंबर 2023 में कालाकोटे राजौरी में कार्रवाई में सेना के पांच लोगों समेत दो कैप्टन मारे गए और दो पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए। बाद में, पिछले साल दिसंबर में पुंछ के डेरा की गली में पांच और लोगों की हत्या कर दी गई।

इन घटनाओं ने फोर्स को अलर्ट कर दिया, क्योंकि आतंकियों के पुंछ और राजौरी की पहाड़ियों में फिर से पैर जमाने की कोशिश करने का खतरा बढ़ गया, जो सालों से आतंक मुक्त थे।

पुंछ, राजौरी और डोडा जैसे इलाकों में अतीत में आतंकवादी घटनाएं देखी गईं, लेकिन बाद में हिलकाका पुंछ-सूरनकोट में अड्डे बनाने वाले आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए 2003 में ऑपरेशन सर्प विनाश नाम का एक विशेष अभियान शुरू किया गया था।

ये एक डिवीजन साइज का ऑपरेशन था, जिसमें सात बटालियन और दो ब्रिगेड हेडक्वार्टर शामिल थे। 9 पैरा स्पेशल फोर्सेज के नेतृत्व में, 163 इन्फैंट्री ब्रिगेड और 12 RR सेक्टर की छह दूसरी यूनिट ने हिस्सा लिया। इस ऑपरेशन में लगभग 60 आतंकवादियों का सफाया कर दिया गया और कुल मिलाकर शांति कायम होने लगी।

जब 2020 में भारत और चीन गलवान में आमने-सामने आए, तो सेना को जम्मू के इन इलाकों से हटा कर, लद्दाख ले जाया गया और LAC पर तैनात कर दिया, क्योंकि तब इन इलाकों में शांति कायम थी।

इस बीच, भारत और पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में LoC पर युद्धविराम समझौते का पालन करने पर भी सहमत हुए, क्योंकि सीमापार से कभी भी गोलीबारी हो जाती थी और खासतौर से अनुच्छेद 370 हटने कने बाद।

इस इलाके में सुरक्षा बलों पर लगातार हमलों के बाद, भारतीय सेना ने 2023 के आसपास राजौरी-पुंछ सेक्टर में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की। आतंकियों ने जम्मू में नागरिकों को भी निशाना बनाया। जनवरी 2023 में राजौरी जिले के डांगरी गांव में एक आतंकवादी हमले में सात नागरिक मारे गए, जबकि रियासी में तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस को निशाना बनाया गया, जिसमें 9 लोग मारे गए और कई घायल हो गए।

इस सबने एक और चुनौती खड़ी कर दी है और सुरक्षा बलों के लिए एक नया मोर्चा खोल दिया, जिससे उसे निपटना है। जबकि सेना का बड़ा हिस्सा लद्दाख और कश्मीर में भी तैनात है।

घातक हथियारों से लैस हैं ट्रेंड आतंकी

माना जाता है कि इन जंगलों में सक्रिय आतंकवादी हाइली ट्रेंड हैं और अमेरिकी सेना के इस्तेमाल की जाने वाली M4 राइफलों समेत कुछ एडवांस हथियारों से लैस हैं। सेना को शक है कि इनमें से कुछ आतंकवादी पाकिस्तान के रिटायर सैनिक हैं।

उत्तरी कमान के तत्कालीन जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ और अब भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मीडिया को बताया, “उन्होंने पाकिस्तान और अफगानिस्तान समेत कई देशों में ट्रेनिंग ली होगी। वे काफी वेल ट्रेंड थे, यही वजह है कि हमें उन्हें खत्म करने में कुछ ज्यादा समय लगा।”

पाकिस्तान और अफगानिस्तान की पहाड़ियों में ट्रेनिंग लेने वालों को इन इलाकों में कोई मुश्किल नहीं आती।

सुरक्षा बलों को अक्सर जम्मू रीजन में इन आतंकवादियों की तरफ से इस्तेमाल की जाने वाली M4 राइफलें मिली हैं, जिनमें थर्मल स्कोप लगे होते हैं। पिछले महीने डोडा में, जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया था, तो थर्मल स्कोप वाली एक M4 राइफल बरामद की गई थी।

इस बंदूक की खासियत ये है कि इसे बैटरी के जरिए ज्यादा लंब समय तक ऑपरेट किया जा सकता है। कई लोग कहते हैं कि ये सेटअप अफगानिस्तान और पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में आम है। अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद बचा हुआ हथियार भी जम्मू-कश्मीर में पहुंच गया है।

ये आतंकवादी स्टील-कोर कवच भेदने वाली गोलियों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जो बैलिस्टिक आरमर और प्रोटेक्टिव शील्ड तक को भेद देती हैं।

सुरक्षा बलों को हाइली एन्क्रिप्टेड चाइनीज टेलीकॉम गियर जिसे "अल्ट्रा सेट" के नाम से जाना जाता है, आतंकवादियों के पास से बरामद किया गया था। इसका इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना भी करती है। पुंछ के सुरनकोट इलाके और कश्मीर के सोपोर इलाके में गोलीबारी के बाद सेना ने ये डिवाइस बरामद किए थे। सुरक्षा बलों ने इन आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए इन इलाकों में जवानों को भी तैनात किया है।

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