EXPLAINER: 18 दिन पहले भारत आई थीं शेख हसीना, अब अचानक क्यों पहुंच गईं चीन, मोदी सरकार की बढ़ी टेंशन

Sheikh Hasina China Visit 2024: बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना किसी चतुर राजनेता की तरह अपने दोनों हाथों में लड्डू रखना चाहती हैं. पिछले महीने अपनी भारत यात्रा पूरी करने के बाद हसीना अब चीन की तीन दिवसीय यात्रा पर पहुंच चुकी हैं. माना जा रहा है कि तीस्ता नदी प्रबंधन के मुद्दे पर चीन से उनकी बात हो सकती हैं. उनके इस दौरे पर भारत की भी सतर्क निगाहें लगी हुई हैं. इसकी वजह ये है कि भारत, चीन को रणनीतिक रूप से बेहद अहम चिकन नेक एरिया से दूर करना चाहता है. इसके लिए उसने तीस्ता नदी प्रबंधन के लिए बांग्लादेश को पूरी मदद देने का आश्वासन दिया है. 

सुनहरे अवसर के रूप में देख रहा चीन

सूत्रों के मुताबिक पिछले कई वर्षों से बांग्लादेश में अपने फुटप्रिंट मजबूत करने में जुटा चीन शेख हसीना के आगमन को एक सुनहरे अवसर के रूप में देख रहा है. वह किसी भी तरह बांग्लादेश को अपने पाले में करके भारत पर रणनीतिक दबाव बढ़ाना चाहता है. यही वजह रही है कि जब पीएम शेख हसीना बीजिंग पहुंची तो उनका रेड कारपेट वेलकम किया गया. खुद चीनी प्रधानमंत्री पीएम Li Qiang उनके स्वागत के लिए मौजूद थे. 

शेख हसीना का किया रेड कारपेट वेलकम

इससे पहले, द्विपक्षीय बैठक के लिए पहुंचते ही बांग्लादेश की प्रधानमंत्री का रेड कारपेट स्वागत किया गया और प्रधानमंत्री ली ने उनका स्वागत किया. इसके बाद उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात हुई. दोनों पक्षों में रोहिंग्या मुद्दे, व्यापार, व्यापार और वाणिज्य, निवेश और विभिन्न क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई. इस दौरान दोनों देशों ने 21 समझौतों और एमओयू पर हस्ताक्षर किए. साथ ही अपने रणनीतिक सहकारी संबंधों को और बढ़ाने के लिए सात और परियोजनाओं की घोषणा की.

बांग्लादेश को कई ऋण देने का ऐलान

बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बांग्लादेश संगबाद संगठन (BSS) ने बताया कि बैठकों के दौरान, दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को व्यापक रणनीतिक सहकारी साझेदारी तक बढ़ाने पर सहमत हुए. बांग्लादेश को भारतीय प्रभाव से मुक्त कर अपने खेमे में लाने के लिए शी जिनपिंग ने शेख हसीना को अनुदान, ब्याज मुक्त ऋण, रियायती ऋण और वाणिज्यिक ऋण समेत चार तरीकों से बांग्लादेश को आर्थिक मदद की घोषणा की. 

विदेश मंत्री डॉ. हसन महमूद ने पत्रकारों को दोनों नेताओं के बीच बैठक के नतीजे के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि आर्थिक और बैंकिंग क्षेत्र में सहयोग, व्यापार और निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे का विकास, आपदा प्रबंधन में सहायता, छठे और नौवें बांग्लादेश-चीन मैत्री पुलों का निर्माण, बांग्लादेश से कृषि उत्पादों का निर्यात और लोगों से लोगों की कनेक्टिविटी से जुड़े समझौतों पर साइन किए गए. 

हसीना के दौरे पर भारत की नजर

सूत्रों के मुताबिक भारत की निगाह इस बात पर रहेगी कि हसीना के इस दौरे पर क्या तीस्ता परियोजना पर चर्चा होती है. अगर हां तो बांग्लादेश और चीन आपस में किस तरह का समझौता या बातचीत करते हैं. दोनों के बीच अगर इस मुद्दे पर कोई सहमति बनती है तो उसका असर भारत पर पड़ना तय है. 

तीस्ता नदी तिब्बत से निकलकर भारत में प्रवेश करती है और पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग, न्यू जलपाईगुड़ी से होते हुए बांग्लादेश चली जाती है. इस नदी का जल बंटवारा भारत और बांग्लादेश के बीच एक विवादास्पद मुद्दा रहा है. गर्मियों में बांग्लादेश में पानी की कमी हो जाती है और उसकी डिमांड है कि भारत गर्मियों में उसके लिए नदी में ज्यादा पानी छोड़े. जबकि भारत अपने लोगों की जरूरतों को देखते हुए ऐसा नहीं कर सकता. 

क्या है तीस्ता जलाशय परियोजना? 

ऐसे में बांग्लादेश अब अपने हिस्से में बड़ा रिजर्वायर बनाना चाहता है, जहां पर वह तीस्ता नदी में बारिश के पानी को इकट्ठा करना चाहता है, जिससे गर्मियों के दिनों में वह अपने लोगों को पानी की आपूर्ति कर सके. उसने इस प्रोजेक्ट को तीस्ता जलाशय परियोजना नाम दिया है. बांग्लादेश की यह परियोजना सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब है, जिसे चिकन नेक के नाम से भी जाना जाता है. 

यह भूमि की 20-22 किमी की पट्टी है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भूमि भारत से जोड़ती है. भारत को तोड़ने की साजिश में लगा चीन किसी भी तरीके से इस पट्टी के पास पहुंच बनाना चाहता है, जिसे जंग के हालात में वह इसे काटकर भारत को पंगु बना सके. यही वजह है कि बांग्लादेश के इस प्रोजेक्ट में खासी रूचि ले रहा है. ऐसा करके वह किसी भी तरह चिकन नेक कॉरिडोर तक पहुंच बनाना चाहता है, जिसे देखते हुए भारत भी खासा सजग है. 

'भारत- बांग्लादेश करें तो ठीक रहेगा'

ढाका में कार्यरत पत्रकार स्वदेश राय इस मुद्दे पर कहते हैं कि तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश के बीच स्थित है. ऐसे में उसके पानी का प्रबंधन भारत और बांग्लादेश को ही मिलकर करना चाहिए. अगर इस मामले में कोई तकनीकी दिक्कत आती है तो उसे भी दोनों देशों को मिलकर सुलझाना चाहिए. इस प्रोजेक्ट में चीन को शामिल करना किसी भी रूप में ठीक नहीं है. भारत इसे कभी भी स्वीकार नहीं करेगा. वे इस मामले में चीन को जोड़ने को साजिश मानते हैं. 

2024-07-10T15:42:03Z dg43tfdfdgfd