रूस से लिए मिलिट्री उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स बनेंगे भारत में, मोदी-पुतिन की मीटिंग में उठा था मुद्दा

नई दिल्ली : रूस-यूक्रेन युद्ध का असर भारतीय फौज पर भी हुआ है। रूस से लिए गए मिलिट्री उपकरणों के स्पेयर पार्ट्स मिलने में देरी हो रही है और अब इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से बात की है। दोनों नेताओं के बीच मॉस्को में हुई बातचीत में पीएम मोदी ने स्पेयर पार्ट्स की डिलीवरी में हो रही देरी का मसला उठाया। दोनों देशों ने तय किया है कि कि रूस ओरिजन के जो मिलिट्री उपकरण भारत के पास हैं उनके स्पेयर पार्ट्स की डिलीवरी में तेजी लाई जाएगी। स्पेयर पार्ट्स के भारत में जॉइंट प्रॉडक्शन करने पर भी सहमति बनी है।

रूस भारत की रक्षा जरूरतों को पूरी करने का सबसे बड़ा सप्लायर है। भारत की आर्मी, नेवी, एयरफोर्स तीनों के पास ही बड़ी संख्या में रूसी उपकरण और प्लेटफॉर्म हैं। आर्मी के पास मेन बैटल टैंक टी-72, टी-90 भी रूस से लिया हुआ है। इंडियन एयरफोर्स के पास मिग-21, मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट रूस से लिए हुए हैं। ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट में एन-32, आईएल-76, आईएल-78 रूस से लिया हुआ है।

एयरफोर्स के पास Mi- 17, Mi- 17iv, Mi-15v5, Mi-35, Mi-26 हेलिकॉप्टर रूस से लिया हुआ है। Mi-26 हेलिकॉप्टर का ओवरहॉल होना है और स्पेयर पार्ट्स नहीं होने से ये उड़ान नहीं भर पा रहा है। एयरफोर्स के पास मौजूद Mi-26 हेलिकॉप्टर कुछ सालों से इस्तेमाल नहीं हो पा रहे हैं। एयरफोर्स ने रूस से चार Mi-26 हेलिकॉप्टर लिए थे।

अभी एयरफोर्स के पास दो Mi-26 हेलिकॉप्टर हैं जो ओवरहॉल के इंतजार में ग्राउंडेड हैं। Mi-26 हेलिकॉप्टर दुनिया का सबसे बड़ा हेलिकॉप्टर है। इसका अधिकतम टेकऑफ वजन 56 हजार किलो है यानी यह 56 हजार किलो वजन के साथ उड़ान भर सकता है। इसमें 90 लोग बैठ सकते हैं।

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